_______________________________
Latest News

सावधान आदमी काम पर है

, Posted by Madhaw Tiwari at 5:09 PM

दिल्ली आगमन पर मेरे रहने का एक अकेला आशियाना था... मेरे एक दूर के जानने वाले का घर... पश्चिमी दिल्ली के एक छोर पर... नांगलोई इलाके में राजधानी पार्क कॉलोनी... नाम राजधानी पार्क... लेकिन राजधानी जैसा कुछ नहीं... यहां मेरा पहला क़दम पड़ा सड़क के गड्ढे में... मुझे बताया गया.. कि विकास जल्द ही पहुंचने वाला है... पिछली कॉलोनी तक पहुंच गया है.... विधायक जी ने सड़क को संगमरमर की तरह चिकना बना दिया है... अब इसी की बारी है... ख़ैर कुछ दिनों तक पहाड़ी इलाकों का ऐहसास कराने वाली... इन सड़कों से मैं बराबर रू-ब-रू होता रहा... फिर मुझे विकास की परछाई नज़र आई... सावधान आदमी काम पर है... ये बोर्ड देखा तो मैंने सोचा... चलो कुछ दिन बाद चिकने सड़क पर क़दम रखने का मौका मिलेगा... लिहाज़ा अभी के दुख को झेल लेते हैं... बनते-बनते क़रीब छे-सात महीने में सड़क तैयार हो गई... और फिर क्या था... इलाके के बच्चों को तो अपना स्टेडियम मिल गया... शाम को कहीं बैडमिंटन तो कहीं क्रिकेट... और कभी-कभी रेस भी हो जाती थी... दिल्ली की बसों में धक्के खाने के बाद मैं इस सुखद ऐहसास को खोना नहीं चाहता था... और ख़ुद भी इसका हिस्सा बन जाता... लेकिन शायद विकास को हमारी ये खुशी देखी नहीं गई.... और विधायक महोदय ने इलाके में सीवर लाइन डालने की योजना बना डाली... काम भी आनन-फ़ानन में शुरू हो गया... मार्च का आख़िरी जो चल रहा था... चिकनी सड़क पर फ़ावड़े चलने लगे... और देखते ही देखते दो महीने में पूरी सड़क मिट्टी में तब्दील हो गई... बड़ी-बड़ी पाइपें आईं... एक साल तक ये ही हाल रहा... नौजवानों ने जिम जाना छोड़ दिया था... गाहे-बगाहे... उन्हे मौका मिल जाता था... गाड़ियों को धक्का लगाने का... अच्छी एक्सरसाइज़ करने का.... युवतियों और महिलाओं ने श्रृंगार करना छोड़ दिया था... आते-जाते ख़ुद-ब-ख़ुद मे-कप हो ही जाता था... साल भर बाद पाइप लाइन पड़ गई... फिर सड़क का टेंडर हुआ... मेरे कानों तक बात पहुंची की इस बार आरसीसी वाली सड़क बनेगी... खूब चिकनी और मजबूत भी... दशहरे में कोई बांस लगाना चाहे तो ना लगे... वैसे ये बात सही साबित हुई और सात-आठ महीने में सड़क बनाने का काम शुरू हो गया... विकास का ये सिलसिला देखकर मेरे खुरापाती पत्रकार दिमाग ने इसे अपनी केंद्र सरकार से जोड़ने लगा... केंद्र सरकार की नीति भी इलाके में हुई इस विकास की धारा की तरह लगती है... ये सरकार अमीर कारोबारियों को बढ़ावा देती है... उन्हे संगठित करती है... और भारत में असंगठित क्षेत्र पर लात मार कर रोज़गार के अवसरों को कम करती जाती है... फिर रोज़गार गारंटी बिल लाकर इन बेरोज़गारों को रोज़गार देने की बात भी करती है... चाइना और जापान ने भी यही नीति अपनाई थी... लेकिन उन्हे मुंह की खानी पड़ी... और अब ये अपने देश में असंगठित क्षेत्र को बढ़ावा देने में लगे हुए हैं.... ख़ैर ये सब मैं सोच ही रहा था... कि विकास की एक और सुगबुगाहट मेरे कानों तक पहुंच गई... अब इस इलाके के पार्षद महोदय की बारी है.... वो सड़क के किनारे नाले बनाने की तैयारी में हैं... तर्क है कि बारिश से बीमार हो चुकी सड़क पर आए दिन पानी लग जा रहा है...

Currently have 0 comments:

World of Images