हम गोलियों का जवाब कलम से देंगे...
वो मूसा ख़ान खैल है........ वो हमारे दिलों में ज़िंदा है
वो हमें हिम्मत देता है ......... हम आतंक के ख़िलाफ़ लड़ते रहेंगे
हम स्वात की सच्चाई बताते रहेंगे........ हम कभी पीछे नहीं हटेंगे
पाकिस्तानी मीडिया डटी है.. आतंकियों की धमकी से कलम के ये सिपाही नहीं डरते... डरते तो वो हैं जिन्हे इनकी कलम से डर लगता है... जिन्हे सच्चाई से डर लगता है... जिन्हे लगता है कि पत्रकार उनके लिए एक ख़तरा हैं...
मूसा ख़ान गोलियों से भून दिया गया... उसे 32 गोलियां मारी गईं... 32 गोलियां.. ये गोलियां बताती हैं कि पत्रकारों से कितना डरते हैं वो.. जिन्हे सच्चाई से लगता है डर... इतना ही नहीं गोलियों से छलनी करने के बाद.. बेरहम क़ातिलों ने मूसा की गर्दन काट दी...
मूसा जीओ टीवी के संवाददाता थे... और जीओ टीवी को पता है कि किसने किया है मूसा का क़त्ल... लेकिन अभी वो ख़ामोश हैं... वो इसलिए ख़ामोश हैं क्योंकि वो नहीं चाहते कि हत्यारों का नाम सामने रखने पर स्वात में माहौल न बिगड़ जाए... लेकिन जीओ टीवी के संपादक ने सीना ठोंककर कहा कि मीडिया को डराने की ये एक नाकाम कोशिश है... और हम आतंकियों के ख़िलाफ़ लगातार लड़ते रहेंगे.. हम गोलियों का जवाब कलम से देंगे...
मूसा को पहले भी धमकियां मिलती रही थीं... और वो बुधवार का दिन था... जब मूसा स्वात में एक शांति मार्च को कवर कर रहे थे... वहां मौलाना सूफी मुहम्मद अपने दामाद औऱ तालीबान नेता फजलुल्लाह से बात कर रहे थे... इसी दौरान मूसा को निशाना बनाया.. गोलियों से जान लेने के बाद.. उसका सर कलम कर दिया गया
और ये पहला मौका नहीं है जब आतंक की सच्चाई को सामने लानेवाले पत्रकारों को निशाना बनाया गया है... इससे अब्दुल अज़ीज़ और कारी शोएब को भी स्वात में मारा जा चुका है...


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