कॉफ़ी हाउस की यादें...
, Posted by Madhaw Tiwari at 7:13 AM
ज़माने पहले से दिल्ली के कनॉट प्लेस के इंडिया कॉफ़ी हाउस ने देश के हर रंग को महसूस किया.... आज़ादी के बाद से दिल्ली के दिल में मौजूद इस कॉफी हाउस ने इंडियन पॉलिटिक्स के सारे उतार चढ़ाव देखे हैं.... 1957 से लेकर आज तक इस कॉफी हाउस ने ज़माने की हर मुश्किल... हर खुशी.. हर दुख को महसूस किया है... कुछ बुज़ुर्ग इस कॉफ़ी हाउस में बैठकर उन यादों को ताज़ा कर लिया करते हैं.. लेकिन अब ये कॉफी हाउस ख़ुद यादों में समाने जा रहा है... कनॉट प्लेस के इनर सर्किल पर मोहन पैलेस में बना इंडिया कॉफ़ी हाउस बंद होने के कगार पर है... दरअसल ये कॉफ़ी हाउस एनडीएमसी की बिल्डिंग में है... और इंडिया कॉफ़ी हाउस पर 41 लाख 52 हज़ार रुपए किराया बकाया है... किराए का ये मामला काफ़ी सालों से अदालत में चल रहा है... और अब अदालत ने मई 2009 में किराया न देने की सूरत में कॉफ़ी हाउस को खाली करने का आदेश दिया है... इंडिया कॉफी हाउस के पास 10 जून तक का वक़्त है.... अगर इस दरम्यान अदालत से स्टे ऑर्डर नहीं मिलता है या फिर कॉफी हाउस किराया अदा नहीं करता है तो... ये तय है कि सालों पुरानी ये क़ॉफी हाउस बंद हो जाएगी...
इंडियन कॉफ़ी हाउस से ढेरों यादें जुड़ी हैं... कई लोगों के लिए तो ये एक परिवार बन गया था... वो परिवार जहां आकर अपनी हर बात शेयर करना एक आदत सी है... और इसी आदत में न जाने कब शुमार हो गई कॉफ़ी की वो खुशबू... जो भुलाये ना भूलेगी...
इस कॉफ़ी हाउस ने काफ़ी उतार चढ़ाव देखे... और सालों तक दिल्ली में इसने सोशल नेटवर्किंग में अहम जगह बनाई... ये जगह इतनी हैपनिंग रही है कि इसे मिनी पार्लियामेंट तक कहा जाता है... चाहे वो नेता हो... साहित्यकार हो या कोई बुद्धजीवी.. सबकी फेवरेट रही है इंडियन कॉफी हाउस... ये कॉफी हाउस तमाम बड़े नेताओं के विचारों और उनके बीच के तर्क-वितर्क का गवाह है.. जहां इंदिरा गांधी से लेकर आई के गुजराल... और शीला दीक्षित ने कॉफ़ी की चुस्कियां ली हैं... हालांकि सालों के सफ़र में इंडियन कॉफ़ी हाउस को लोगों की बेरुखी भी देखने को मिली... लेकिन कुछ लोगों के लिए सालों से यहां बैठते बैठते ये कॉफ़ी हाउस अपना दूसरा घर सा बन गया है... यहां के कर्मचारी परिवार के सदस्यों सरीखे हो गए हैं... ऐसे में यहां की समस्या उन्हे परिवार की समस्या जैसी लगती है... लेकिन वो भी अपनी ज़िंदगी की उलझनों में ही उलझे हुए हैं.... लिहाज़ा अब इसका शटर डाउन होते हुए देखना... उनके लिए ज़िंदगी का एक हिस्सा खोने जैसा है...
मसला बस इतना नहीं कि कॉफी की वो खुशबू बंद हो जाएगी... और शटर डाउन होने पर ये इंडियन कॉफी हाउस लोगों की यादों में समा जाएगा... मसला ये भी है कि इस मिनी पार्लियामेंट के बंद हो जाने पर यहां के कर्मचारियों का क्या होगा...हालांकि कॉफी कंज्यूमर फोरम कोशिश कर रहा है कि इंडियन कॉफी हाउस के कर्मचारियों को इंडियन कॉफी बोर्ड या दिल्ली सरकार के कॉफी होम में ट्रांसफर कर दिया जाए... फिर भी कर्मचारियों को अपनी रोज़ी रोटी का डर सताने लगा है...
देश के दूसरे शहरों से आनेवाले छात्रों के लिए भी ये कॉफी हाउस एक फेवरिट जगह है... क्योंकि यहां पर दूसरी जगहों के मुकाबले काफ़ी कम दाम पर खाना मिलता है... साथ ही घंटों बैठकर किसी भी मुद्दे पर बहस करने का मज़ा ही कुछ और है... लेकिन अब अगर इंडियन कॉफी हाउस के लिए कुछ किया नहीं गया तो वो दिन... वो पल यादें बन कर रह जाएंगे...


आपने लिखा है "शीला दिक्षित ने यहाँ काफी की चुस्कियाँ ली हैं" वे चाहे तो बचा सकती है इसे.