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टूटी हुई... बिखरी हुई हंसी...

, Posted by Madhaw Tiwari at 11:23 PM

कभी हम हंसते थे तो ज़माना हंसता था... रोते थे तो भी ज़माना हंसता था... हमारी हर अदा... हर बात में ज़िंदगी की मुस्कुराहट थी... ताज़िंदगी हमने ज़िंदगी ही बांटी थी... हर किसी का ग़म हमारा ग़म था... लेकिन आज जब ज़िंदगी ने हमसे मुंह मोड़ लिया है... ग़म ने एक रिश्ता सा जोड़ लिया है... तो ना वो ज़माना है ना ही वो ज़मानेवाले... मैं उदास नहीं हूं... उदासी मेरी आदत बन गई है...

अब ये बिस्तर है... और चादर तकिए का साथ... 80 से 90 के दशक तक बॉलीवुड में अपनी मसखरी से धमाल मचानेवाले पाल सिंह की ज़िंदगी ठहर गई है... एक एक्सीडेंट ने इस हंसोड़ को बिल्कुल लाचार कर दिया है... पाल सिंह का स्पाइनल कॉर्ड यानि रीढ की हड्डियां ऑपरेशन के बाद सुस्त हो गई हैं... ऐसे में पाल सिंह अपनी जगह से हिल भी नहीं सकते... आठ साल से वो बिस्तर पर पड़े हैं... घर में पत्नी है... एक बेटी है... एक बेटा है.... पाल सिंह के बिस्तर पर पड़ जाने से घर में कोई आर्थिक ज़रिया नहीं रहा... जैसे-तैसे कुछ मदद से इनकी दवाई चल रही है...
साल 2000 में पाल सिंह शूटिंग से लौट रहे थे... जब उनका एक्सीडेंट हुआ... और गर्दन से लेकर कमर तक का हिस्सा जवाब दे गया... बेटी जसवंत कौर बी ए की पढ़ाई करती है... बेटा यशपाल सिंह अभी सातवीं में है... ज़ाहिर है पढ़ाई का खर्च ज़्यादा है... और मुंबई जैसे शहर में परिवार चलाना... ये ज़िम्मेदारियां अब पाल सिंह की पत्नी के ऊपर हैं... और पूरे परिवार का खर्च कैसे चलता है... वही जानती हैं...
इतनी जद्दोजहद में पिछले आठ सालों से चार लोगों का ये कुनबा किसी तरह ज़िंदगी की गाड़ी को खींच रहा है.... लेकिन अब हालात ऐसे हैं कि पाल का परिवार मर-मर के जी रहा है... पाल को उम्मीद है कि उनका दूसरा कुनबा यानि बॉलीवुड उनकी मदद करेगा... और उम्मीद है उस ज़माने से है कि जिसको हंसाने में पाल ने कोई कोर कसर नहीं छोड़ी... उसकी हंसी वापस करने के लिए ये ज़माना ज़रूर आगे आएगा...

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