ये भारत की जीत है...
ये सम्मान भारत का है... ये सम्मान भारत की उस ज़मीन का है... जो पूरी दुनिया को सीख देती है... सीख देती है ज़िंदगी की... सीख देती है उम्मीदों और सपनों को सच्चाई में तब्दील करने की... मुंबई की पथरीली ज़िंदगी... वो ज़िंदगी जहां से रोज़ाना निकलती है एक कहानी... और उन्ही में से एक कहानी पहुंचगई फ़िल्मी दुनिया की सबसे बड़ी अवार्ड सेरेमनी के मंच पर... इस कहानी को फ़िल्माते वक़्त वार्नर ब्रदर्स की टीम ने भारत से बहुत कुछ सीखा...
मुंबई में ही बनी कम बजट की इस फ़िल्म के डायरेक्टर को बेस्ट डॉयरेक्टर के लिए ऑस्कर अवार्ड दिया गया... उनका कहना था कि इस फ़िल्म की वजह से उनका दिल मुंबई से जुड़ गया है...
भारत को डबल ऑक्सर दिलानेवाले अल्ला रक्खा रहमान ने भी मुंबई का शुक्रिया अदा किया.. और कहा कि ये अवार्ड मुंबई के लिए है..
स्लम़डॉग मिलिनेयर के अलावा भारतीय बैकग्राउंड पर बनी डॉक्यूमेंट्री स्माइल पिंकी ने भी बेस्ट डॉक्यूमेंट्री शॉर्ट का अवार्ड अपने हक़ में किया... पिंकी मेरठ की वो लड़की है जिसके होठ टेढ़े हैं.. और एक सोशल वर्कर उसका ऑपरेशन करवाकर उसे ठीक कराती है... डॉक्यूमेंट्री की डायरेक्टर और प्रोड्यूसर मेगन माइलन ने ऑस्कर के उपहार को भारतीयों की देन कहा..
भारत की ज़मीन से एक और फ़िल्म थी... जो स्माइम पिंकी के साथ ही बेस्ट डॉक्यूमेंट्री शॉर्ट सब्जेक्ट में नामिनेट हुई थी... वो फ़िल्म थी पोलियो उन्मूलन कार्यक्रम पर बनी फ़िल्म द फ़ाइन इंच... यानि कुल मिलाकर ऑस्कर में भारत से जुड़े 12 नामांकन थे... जिनमें से 9 ने बाज़ी मार ली... और 81वें अकेडमी अवार्ड्स में ये भारत की जीत है...
ऑस्कर विजेता रसुल पूकुट्टी

लेकिन जब रसुल को पहचान मिली.. तो छप्पर भाड़कर मिली... ये पहचान दिलाई वॉर्नर ब्रदर्स की फ़िल्म स्लमडॉग मिलिनेयर ने... रसुल पूकुट्टी का नाम आज अंतर्राष्ट्रीय ऑडियो सोसायटी में लिया जाता है... उन्हे स्लमडॉग मिलिनेयर के लिए इयॉन टैप और रिचर्ड प्राइक के साथ बेस्ट साउंड मिक्सिक का ऑस्कर अवार्ड मिला है... इससे पहले भी रसुल को स्लमडॉग के लिए ही बाफ़्टा का पुरस्कार मिल चुका है...

लॉस एंजलिस के कोडेक स्टूडियो की लाल कालीन से गुज़रते हुए आज ज़रूर रसुल को एक मुकाम दिया है जिसने उनकी ज़िंदगी को रौशन कर दिया है... लेकिन उन्होने वो वक़्त भी देखा है जब उनके गांव में बिजली नहीं थी... और पढ़ाई के लिए केरोसीन लैंप की मध्धम रोशनी काफ़ी हुआ करती थी..
आज रसुल जिस मुकाम पर हैं उस मुकाम तक कोई साउंड मिक्सर... साउंड डिज़ायनर या साउंड इंजीनियर नहीं पहुंचा है... और इस मौके पर रसुल ने अपनी इस कामयाबी को देश के नाम कर दिया...
भारत की जय हो...
स्लमडॉग मिलेनियर... द टॉप डॉग ऑफ़ द ईयर... 8 ऑस्कर्स इन अ रो...
पहला... बेस्ट फिल्म : स्लमडॉग मिलिनेअर
दूसरा.. बेस्ट म्यूजिक : ए . आर . रहमान और गुलजार ( स्लमडॉग मिलिनेअर )
तीसरा.. बेस्ट ऑरिजनल स्कोर : ए . आर . रहमान ( स्लमडॉग मिलिनेअर )
चौथा... बेस्ट डायरेक्ट : डैनी बोयल ( स्लमडॉग मिलिनेअर )
पांचवां... बेस्ट एडिटिंग : क्रिस डेकेन्स ( स्लमडॉग मिलिनेअर )
छठा... बेस्ट साउंड : मिक्सिंग रेसुल पूकुट्टी ( स्लमडॉग मिलिनेअर )
सातवां... बेस्ट सिनेमेटोग्राफी : ऐंटनी डॉड मैंटल ( स्लमडॉग मिलिनेअर )
आठवां... बेस्ट अडाप्टेड स्क्रीनप्ले : साइमन बॉफॉय ( स्लमडॉग मिलिनेअर )
लॉस एंजलिस के कौडेक थिएटर में अगर कोई था... तो बस स्लमडॉग मिलेनियर... वो फ़िल्म जिसने 10 कैटेगरीज़ में जगह बनाई थी... और उनमें से आठ में बाज़ी भी मार ली... हॉलीवुड की हस्तियो से सजी लॉस एंजलिस की ये शाम भारतीय फ़िल्म में इतिहास बना गई... वो इतिहास जिसमें... रहमान हैं... गुलज़ार हैं... रेसुल पूकुट्टी हैं.. और जिसका हिस्सा हैं बॉलीवुड झक्कास मैन अनिल कपूर... इरफ़ान ख़ान.. दोव और फ्रीडा पिंटो..
अमेरिका की धरती पर भारतीय फ़िल्म इंडस्ट्री की वो धमक है... जिसकी गूंज सालों तक बनी रहेगी... भारत के नाम हुईं तीन मूर्तियां.. रहमान... गुलज़ार और पूकुट्टी... इस त्रिमूर्ति ने एक नए दौर की शुरुआत की है... वो दौर जब भारतीय सिनेमा को विश्व मंच पर और आगे ले जाएगी...
ये फ़िल्म का नोबल प्राइज़ है... जो भारत की धरती पर बनी... मुंबई के धारावी और बोरीवली में झोपड़ पट्टी की ज़िंदगी को दिखा रही है.... वहां एक बच्चे के सपने को दिखा रही है... उसकी उम्मीदों में सच्चाई के पंख लगाकर जब डैनी बॉयल ने हालात से लड़ती उस ज़िंदगी को 70 एमएम पर दिखाया... तो रहमान की धुनों पर पूरी दुनिया ने कहा जय हो...
रहमान के साए में ऑस्कर की जय
ऑस्कर अवार्ड्स को लेकर काफ़ी हो हल्ला है... रहमान को मिलेगा की नहीं... गुलज़ार को मिलेगा की नहीं... लेकिन सवाल ये है कि गुलज़ार और रहमान जैसे संगीत के एनसाइक्लोपिडिया को क्या ऑस्कर जैसे अवार्ड्स की ज़रूरत है...

रहमान वो शख़्सियत है जो... जिस किसी के साथ काम करते हैं... वो ख़ुद को सम्मानित महसूस करता है... जिस अवार्ड सेरेमनी में जाते हैं... उस अवार्ड सेरेमनी की गरिमा बढ़ जाती है... ऐसे में सवाल ये नहीं है कि रहमान को ऑस्कर की मूर्ति मिलेगी या नहीं.. सवाल ये है कि क्या ऑस्कर की मूर्ति रहमान के हाथों में आकर ख़ुद का मान बढ़ा पाएगी या नहीं... ठीक यही बात गुलज़ार साहब के लिए भी है...

कोई भी अवार्ड ऐसा नहीं है तो ए आर रहमान के कद को छू सके... ख़ुद अवार्ड्स का कद बढ़ जाता है... जब उसका नाम ए आर रहमान से जुड़ जाता है... ऐसे में रविवार का दिन ये तय करेगा कि 81 साल बाद भी क्या ऑस्कर अपने माथे पर रहमान जैसे सितारे को संजो पाएगा या नहीं... क्या ऑस्कर की सुनहरी मूर्ति इस हीरे की चमक को चुरा पाएगी या नहीं... ऑस्कर में तो रहमान की जय होगी ही... दुनिया में हो रही है... लेकिन क्या रहमान के साए में ऑस्कर की जय होगी...
हम गोलियों का जवाब कलम से देंगे...
वो मूसा ख़ान खैल है........ वो हमारे दिलों में ज़िंदा है
वो हमें हिम्मत देता है ......... हम आतंक के ख़िलाफ़ लड़ते रहेंगे
हम स्वात की सच्चाई बताते रहेंगे........ हम कभी पीछे नहीं हटेंगे
पाकिस्तानी मीडिया डटी है.. आतंकियों की धमकी से कलम के ये सिपाही नहीं डरते... डरते तो वो हैं जिन्हे इनकी कलम से डर लगता है... जिन्हे सच्चाई से डर लगता है... जिन्हे लगता है कि पत्रकार उनके लिए एक ख़तरा हैं...
मूसा ख़ान गोलियों से भून दिया गया... उसे 32 गोलियां मारी गईं... 32 गोलियां.. ये गोलियां बताती हैं कि पत्रकारों से कितना डरते हैं वो.. जिन्हे सच्चाई से लगता है डर... इतना ही नहीं गोलियों से छलनी करने के बाद.. बेरहम क़ातिलों ने मूसा की गर्दन काट दी...
मूसा जीओ टीवी के संवाददाता थे... और जीओ टीवी को पता है कि किसने किया है मूसा का क़त्ल... लेकिन अभी वो ख़ामोश हैं... वो इसलिए ख़ामोश हैं क्योंकि वो नहीं चाहते कि हत्यारों का नाम सामने रखने पर स्वात में माहौल न बिगड़ जाए... लेकिन जीओ टीवी के संपादक ने सीना ठोंककर कहा कि मीडिया को डराने की ये एक नाकाम कोशिश है... और हम आतंकियों के ख़िलाफ़ लगातार लड़ते रहेंगे.. हम गोलियों का जवाब कलम से देंगे...
मूसा को पहले भी धमकियां मिलती रही थीं... और वो बुधवार का दिन था... जब मूसा स्वात में एक शांति मार्च को कवर कर रहे थे... वहां मौलाना सूफी मुहम्मद अपने दामाद औऱ तालीबान नेता फजलुल्लाह से बात कर रहे थे... इसी दौरान मूसा को निशाना बनाया.. गोलियों से जान लेने के बाद.. उसका सर कलम कर दिया गया
और ये पहला मौका नहीं है जब आतंक की सच्चाई को सामने लानेवाले पत्रकारों को निशाना बनाया गया है... इससे अब्दुल अज़ीज़ और कारी शोएब को भी स्वात में मारा जा चुका है...
मुंबई मामला और अमेरिका
अमेरिकी अख़बार वॉशिंगटन पोस्ट में एक ख़बर छपी है.... रिपोर्ट है जॉबी वैरिक और कैरेन यंग की... इस रिपोर्ट के मुताबिक मुंबई हमलों में भारत और पाकिस्तान के बीच जांच रिपोर्ट की बारिकियों के लेन-देन में अमेरिकी ख़ुफ़िया एजेंसी सीआईए ने अहम भूमिका निभाई... इस रिपोर्ट के मुताबिक एक वरिष्ठ पाकिस्तानी अधिकारी ने बताया है कि भारत ने पाकिस्तान को सुबूत तो दिए... लेकिन वो तथ्य नहीं दिए जो इन्हे पुख़्ता करते हैं... जबकि तथ्यों की जानकारी के लिए दोनों देशों के बीच अमेरिकी ख़ूफ़िया एजेंसी सीआईए ने मध्यस्थता कि...
वॉशिंगटन पोस्ट में ये ख़बर आने के बीच साफ दिखता है कि अमेरिका ख़ुद को दोनों देशों के मित्र के रुप में प्रेजेंट करना चाह रहा है... साथ ही अमेरिका साबित करना चाह रहा है कि ये वही है जिसने दोनों देशों के बीच मुंबई हमले पर आए तनाव को कम करने में मदद की... जंग की नौबत नहीं आने दी...
जबकि अमेरिका को पता है कि अगर भारत... पाकिस्तान पर हमला करता तो... अमेरिका के लिए अफगानिस्तान में तालिबान से लड़ना मुश्किल हो जाता... और पाकिस्तान को ये पता था कि अगर हिंदुस्तान से जंग हुई... और वो तालिबान से लड़ाई में अमेरिका मदद नहीं कर सका... तो अमेरिका से मिलनेवाली आर्थिक मदद बंद हो जाती... ऐसे में पाकिस्तान मजबूर था कि वो बातचीत के ज़रिए ही इस मुद्दे का हल निकाले... हालांकि वो बार-बार जंग की गीदड़ भभकी देता रहा... लेकिन अंत में उसे ये कुबूल करना पड़ा कि मुंबई हमला पाकिस्तानियों की देन है...
ये ज़रूर है कि इसमें कहीं न कहीं अमेरिकी दबाव ने भी काम किया... और अमेरिका ने पाकिस्तान पर इसलिए दबाव बनाया... क्योंकि उसे पता है भारतीय उप महाद्वीप भारत की मदद के बिना वो कुछ नहीं कर सकता... साथ ही उसे ये भी पता है कि भारत ही वो देश है जो अफगानिस्तान में सामाजिक ढ़ांचे को एक बार फिर खड़ा करने में उसकी मदद कर सकता है...
ज़ाहिर है अब जब पाकिस्तान का कुबूलनामा आ गया है... अमेरिका ख़ुद को एक निर्णायक भूमिका में पेश करना चाहता है... और इसीलिए इस तरह के बयान आ रहे हैं कि सीआईए की मध्यस्थता ने स्थिति को काबू में किया...

